“जीवन का सारा खेल स्वयं में भटककर, स्वयं तक लौटने का ही है।” — माँ पराम्बा भवानी

“जीवन का सारा खेल स्वयं में भटककर, स्वयं तक लौटने का ही है।” — माँ पराम्बा भवानी
मनुष्य जीवन में सुख, शांति और संतोष को बाहर की दुनिया में खोजता रहता है। अनेक अनुभवों और उतार-चढ़ावों से गुजरने के बाद उसे समझ आता है कि जिस शांति और सत्य की तलाश वह बाहर कर रहा था, वह उसके अपने भीतर ही मौजूद है।
अर्थात, जीवन की यात्रा स्वयं को जानने, समझने और अंततः अपने वास्तविक स्वरूप तक लौटने की यात्रा है। 🙏🌺
← सभी पोस्ट देखें